Conversations With Myself - 1 in Hindi Philosophy by Aarushi Singh Rajput books and stories PDF | Conversations With Myself - 1

Featured Books
  • दरवाजा: काली हवेली का श्राप - 5

    एपिसोड 5 — “जिसने श्राप दिया… वो तुम ही थी”हवा… थम गई थी।पूर...

  • Bayaan - Part 17

    Part 17 "अगले चार महीने..."ये चार महीने मेरी ज़िंदगी के सबसे...

  • Sirf Tumhara - 5

    **Sirf Tumhara**  **Part 5**अंश का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा...

  • Conversations With Myself - 2

    शाम धीरे-धीरे ढल रही थी।पूरा दिन जैसे आँसुओं में भीगकर निकल...

  • Mafia King - 6

    जगह कोई आम ठिकाना नहीं, बल्कि 'रॉयल फिटनेस होटल' था।...

Categories
Share

Conversations With Myself - 1


यह कहानी किसी एक नाम, किसी एक चेहरे या किसी एक ज़िंदगी की नहीं है…
यह कहानी उन सभी एहसासों की है, जो हम अक्सर दुनिया से छुपा लेते हैं।

यह कहानी मेरी है…
और शायद… तुम्हारी भी।

कभी-कभी ज़िंदगी बहुत शांत लगती है,
लेकिन उसी खामोशी में हमारे सबसे गहरे सवाल छुपे होते हैं।
वो सवाल, जिनके जवाब हमें बाहर नहीं… बल्कि अपने अंदर ढूंढने पड़ते हैं।

मैंने हमेशा महसूस किया है कि हर इंसान के भीतर एक अलग ही दुनिया होती है।
एक ऐसी दुनिया जहाँ हम खुद से बात करते हैं,
जहाँ हम अपने डर को समझते हैं,
और अपने सपनों को धीरे-धीरे पहचानते हैं।

इस किताब में मैंने किसी आदर्श इंसान को नहीं बनाया है,
क्योंकि सच यह है कि आदर्श कोई होता ही नहीं।
हर इंसान में कुछ खूबसूरती होती है, और कुछ कमियाँ भी।
और यही चीज़ इंसान को असली बनाती है।

इस यात्रा में मुझे कई ऐसी किताबों से सीखने का अवसर मिला,
जिन्होंने मेरी सोच को एक नई दिशा दी।
उनमें से एक बहुत खास किताब है Shrimad Bhagavad Gita Rahasya।

इस पुस्तक से मुझे जीवन को देखने का एक अलग नजरिया मिला—
एक ऐसी समझ, जहाँ हर परिस्थिति का एक अर्थ होता है,
हर संघर्ष हमें कुछ सिखाने आता है,
और हर कठिनाई के पीछे कोई न कोई सीख छुपी होती है।

लेकिन जो कुछ भी मैंने इस किताब से सीखा है,
मैंने उसे सीधा-सीधा यहाँ नहीं लिखा है।
मैंने उसे अपने अनुभवों के साथ मिलाकर,
अपनी भाषा में, अपने तरीके से इस कहानी में उतारा है।

यह किताब कोई ज्ञान देने की कोशिश नहीं करती…
बल्कि यह मेरी समझ है, मेरी सोच है,
और मेरे दिल से निकले हुए कुछ सच्चे विचार हैं।

मैं एक सामान्य सी लड़की हूँ…
जिसकी उम्र अभी ज्यादा नहीं है,
और जो अभी अपने जीवन के शुरुआती दौर में है।

मेरा नाम आरुशी सिंह राजपूत है।
मैं अभी एक स्कूल स्टूडेंट हूँ,
और अभी-अभी मेरे बोर्ड एग्ज़ाम भी पूरे हुए हैं।

इस उम्र में जब ज़्यादातर लोग बस पढ़ाई और भविष्य के बारे में सोचते हैं,
मैंने अपने अंदर के उन विचारों को भी सुनना शुरू किया है,
जो अक्सर चुप रह जाते हैं।

आप लोग मुझे मेरे nickname से बुला सकते हैं... मुझे "Aaru" कहा जाता है।

और कुछ लोग मुझे प्यार से "Heartless Queen "भी कहते हैं...

लेकिन सच यह है कि हर "heartless" दिखने वाले इंसान के अंदर भी एक बहुत सॉफ्ट दिल होता है, बस वो हर किसी के सामने नहीं आता।

मैं चाहती हूँ कि आप लोग मेरी इस कहानी को पढ़ें... और अपने विचार, अपनी राय ज़रूर comment में बताएं।

ताकि मुझे पता चल सके कि मेरी कहानी आप तक पहुँच रही है या नहीं...

और आप इसे कैसे महसूस कर रहे हैं।

मुझे कहानियाँ लिखना बहुत पसंद है।
कभी-कभी जब मैं कुछ महसूस करती हूँ,
तो वो बात मेरे दिल में रह ही नहीं पाती 
वो अपने आप शब्दों में बदलने लगती है।

मैंने कई जगह अपनी छोटी-छोटी कहानियाँ लिखी हैं,
कभी डायरी में, कभी किसी कॉपी के पन्नों पर,
और कभी बस अपने मन में ही।

इस बार मैंने कुछ नया करने का सोचा—
लेकिन “नया” का मतलब मेरे लिए कोई बड़ी, अलग या दिखावटी चीज़ नहीं है।
इस बार मैंने छोटे-छोटे एहसासों को लिखने का फैसला किया है।

क्योंकि मुझे लगता है…
बड़ी-बड़ी बातें हमेशा ज़रूरी नहीं होतीं,
कभी-कभी छोटे-छोटे विचार ही सबसे गहरे होते हैं।

मैं खुद को बहुत बड़ा लेखक नहीं मानती…
और न ही यह दावा करती हूँ कि मेरी बात हर किसी को सही लगेगी।

लेकिन मैं एक बात ज़रूर जानती हूँ—
जो भी मैं लिख रही हूँ, वो सच्चा है।
वो मेरे अनुभवों से आया है।
वो मेरे अंदर की आवाज़ है।

और शायद… यही सबसे ज़रूरी होता है।

इस किताब में आपको कोई परफेक्ट कहानी नहीं मिलेगी।
यहाँ गलतियाँ भी होंगी, उलझनें भी होंगी,
और कई बार शायद ऐसे विचार भी होंगे,
जिनसे आप खुद को जोड़ पाएँ।

क्योंकि यह किताब सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं है…
यह महसूस करने के लिए है।

हर पन्ना एक छोटा सा एहसास होगा।
हर अध्याय एक छोटी सी सोच होगी।
और हर विचार, कहीं न कहीं आपको अपने अंदर झाँकने पर मजबूर करेगा।

मैं नहीं जानती कि यह यात्रा कहाँ तक जाएगी…
लेकिन मैं इतना ज़रूर जानती हूँ कि यह मेरी एक सच्ची शुरुआत है।

एक ऐसी शुरुआत…
जहाँ मैं खुद को खोजने की कोशिश कर रही हूँ।
और शायद…
इस सफर में आपको भी अपने कुछ टुकड़े मिल जाएँ।

तो चलिए…
खामोशी को सुनते हैं…
और उन शब्दों को समझते हैं,
जो दिल के अंदर चुपचाप रहते हैं…